ग़ज़ल

कभी अचानक सदमों से हम ने संभाली जिंदगी
मौत से डर डर कर यूं हम ने निकाली जिंदगी

जिंदगी को अब तलक जिंदगी सा जीया हमने
फिर भी सबने ये कहा सर पर बिठा ली जिंदगी

जेब में कफ़न की तेरा ख़त पुराना रख लिया
कब्र में भी थोड़ी सी हम ने छिपा ली जिंदगी

हर शख्स यहां मशविरा लिये ढूंढता है मुझे
‘श्याम’ किन समझदारों के बीच बसा ली जिंदगी?

राशन पानी के लिए हसरतें सब बेच दीं
जिंदगी को बेच कर हम ने बचा ली जिंदगी

मानिंद दुल्हन की तुझे नाजों से रखा था कभी
हां मगर अब भाड़ में तू जा ऐ साली जिंदगी

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