ज़िंदगी – A Gazal by GhanShyam Singh Odint

ज़िंदगी | ग़ज़ल

जेब में कफ़न की तेरा ख़त पुराना रख लिया
कब्र में भी थोड़ी सी हम ने छिपा ली जिंदगी

हर शख्स यहां मशविरा लिये ढूंढता है मुझे
‘श्याम’ किन समझदारों के बीच बसा ली जिंदगी?