JNU

क्या आप RSS के सदस्य बनना चाहते हैं?
तो फिर इंतजार किस बात का? अभी घर बैठे लाभ उठाइए संघ के ऑनलाइन सदस्यता अभियान का.. तुरंत अपना मोबाइल उठाइए, JNU के देशद्रोहियों पर एक पोस्ट लिखिए/काॅपी मारिए और इसे पोस्ट कर दीजिए अपनी फेसबुक वाॅल पर और तुरंत पाइए संघ की सदस्यता ‘सर्टिफिकेट सहित’।
नक्कालों से सावधान। सर्टिफिकेट पर ‘लोल सलाम अथवा जय बीम’ का हाॅलोग्राम देखकर ही स्वीकार करें। जल्दी करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है, जेएनयू के बाद अब ऐसे ऑफर भविष्य में आते ही रहेंगे।
आइए जानते हैं हमारी सर्विस का लाभ उठा चुके ग्राहकों का इस सेवा के बारे में क्या कहना है?

जी नमस्कार.. मेरा नाम घनश्याम सिंह और मेरी उम्र 25 वर्ष है। मेरा जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव ‘ओङींट’ में साधारण परिवार में हुआ। परन्तु 25 वर्ष की अल्पायु में ही मुझे गलत संगत की वजह से निष्पक्षता के दौरे पङने लगे। मैंने कई संघियों और नवराष्ट्रवादियों की वाॅल पर अपना इलाज करवाया परन्तु मेरी स्थिति में बिल्कुल भी सुधार नहीं हुआ, उल्टा जिनकी भी वाॅल पर मैं अपना ईलाज करवाने के लिए जाता वो भी इस छूत की बीमारी से ग्रस्त हो जाते थे और उन्हें भी निष्पक्षता की उल्टियां होना शुरु हो जातीं।
दोस्तों, धीरे धीरे मेरे सभी करीबी मित्र व रिश्तेदार मेरी फेसबुक वाॅल से जाने लगे। इस वजह से मुझमें हीन भावना घर कर गई। मैं अपनी ही नजरों में गिर गया और सुधबुध खोकर ब्लाॅग लिखने लगा। मेरी इस बीमारी की वजह से मेरे घरवाले भी बहुत परेशान रहने लगे।
फिर अचानक मेरी जिंदगी में वो दिन आया जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। मुझे आज भी अच्छी तरह याद है, वो 9 फरवरी 2016 का दिन था, मैं निष्पक्षता की हीनभावना से ग्रस्त अपने पलंग पर पङा टीवी देख रहा था कि अचानक टीवी में से मार्क्स भगवान की कृपा आनी शुरु हो गई।
और दोस्तों आप विश्वास तो छोङिए केजरीवाल तक नहीं करेंगे कि उसी समय मुझमें इतनी क्रांतिकारी ऊर्जा का संचार हुआ कि मैं अपने पलंग पर से उठ खङा हुआ। मैंने निष्पक्षता की बेङियों को तोङ डाला और तुरंत फेसबुक पर देशद्रोहियों के खिलाफ एक संघी पोस्ट लिख मारा। उसके बाद तो यह एक सिलसिला ही बन गया.. मैं रोज JNU पर दिन में दो-चार संघी पोस्ट डालने लगा। और मात्र सात दिन के अल्प समय में मैंने आखिरकार वो हासिल कर ही लिया जो मेरा बचपन से सपना था: “जेहादमिश्रित-क्रांतिप्लेटेड-लोलसलामजङित-बुद्धिजीवीप्रमाणित-भगवनमार्क्सहस्ताक्षरित 24 केरैट शुद्ध ISI सर्टिफाइड मनुवादी संघी प्रमाण पत्र”।

जब से मुझे यह प्रमाण पत्र मिला है, मेरी खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा। मेरी तो जिंदगी ही बदल गई है। मेरे जो दोस्त निष्पक्षता की बीमारी की वजह से मुझे अकेला छोङकर चले गए थे वो मेरी वाॅल पर वापस लौट आए हैं और आज मैं एक सुखी ‘संघी जीवन’ बीता रहा हुं।
थैंक यू JNU.. मुझे अपने पुराने दिन लौटाने के लिए..

Odintwala Shyam

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