करवा चौथ

आज सुबह सुबह पत्नी जी करवा चौथ के व्रत की तैयारियां कर रही थी तो मैंने भी ‘बुद्धिजीवी mode’ में आ कर ज्ञान पेल दिया कि कुछ नहीं रखा इन व्रत वगैरह में, फालतू भूखा रहने से कोई फायदा नहीं। और अगले जन्म में करोगी भी क्या मुझ जैसे पति का, एक जन्म की सजा काफी नहीं है क्या भुगतने के लिए?

सुनकर पत्नी जी एंग्री mode में आ गई। बोली “मेरी मर्जी, आपको कोई तकलीफ??”

पत्नी जी को सोनिया मोड में देखकर मैं तुरंत मनमोहन मोड पर आ गया।

सोचने लगा तो समझ आया कि ये जवाब सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि उन तमाम कथित बुद्धिजीवियों को भी था जो करवा चौथ पर अपनी चूङियां तोङ रहे हैं।
हां तो बुद्धिजीवी जी, कोई औरत करवा चौथ का व्रत रख रही है, आपको कोई तकलीफ? आपको कोई नुकसान हो रहा है? देश को कोई नुकसान हो रहा है? आर्थिक मंदी आ रही है? ध्वनि-वायु प्रदूषण हो रहा?
तो फिर क्या टीवी चैनलों की टीआरपी कम हो रही है? आपकी फेसबुक पर लाइक कम हो रहे हैं? असहिष्णुता बढ रही? नहीं। तो फिर समस्या क्या हो रही है?
अबला नारियों का शोषण हो रहा है क्या? कोई उसके माथे पर गन रखकर नहीं करवा रहा है अपने लिए व्रत। इच्छा है तो करो, नहीं है तो मत करो।
और ये क्या रट पकङ रखी है कि उसका पति उसे पीटता है तो भी वो उसके लिए व्रत क्यों रखती है? अगली को वही चाहिए, तुम्हें क्या? सालों कंग्रेस ने 60 सालों तक देश को क्या कम लूटा-पीटा है, फिर भी तुम करते हो ना उसकी लम्बी उम्र की कामना, तुम्हें भी हमेशा हमेशा के लिए वही चाहिए अपने शौहर के रुप में। तो बस यही मामला उनका है बात खत्म।

काहे के बुद्धिजीवी बने फिरते हो बे? फर्क क्या है तुम में और उन मूर्खों में जो ये समझते हैं कि उनको जो सही लगता है वही सारी दुनिया को करना चाहिए। तुम भी तो ऐसे ही सोचते हो।
याद रखियो, Its not a problem until its a problem.

हैप्पी करवा चौथ। अल्लाह कंग्रेस को लम्बी उम्र बख्शे, तुम्हारा सुहाग अमर रहे।

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