सनातन (Part 2)
टेलीफोन का अविष्कार भारत में नहीं हुआ था। फिर टेलीफोन भारत में आया तो स्वभाविक है कि यहां हिंदी में टेलीफोन का समानार्थी शब्द नहीं था। इसलिए टेलीफोन का हिंदी शब्द ‘दूरभाष’ क्रिएट किया गया। ट्रेन के साथ भी ऐसा हुआ, इसलिए हिंदी में ट्रेन का समानार्थी शब्द ‘लौह पथ गामिनी’ क्रिएट किया गया। ऐसा तमाम उन चीजों के लिए हुआ जिनका आविष्कार यहां से अन्यत्र कहीं हुआ था और उन चीजों के लिए हिंदी में पहले से शब्द नहीं थे।
लेकिन... लेकिन Religion के साथ ऐसा नहीं हुआ, जबकि होना चाहिए था। रिलीजन्स का आविष्कार यहां से अन्यत्र हुआ, यहां हमारी भाषाओं में रिलीजन के समानार्थी शब्द ही नहीं थे, क्योंकि टेलीफोन, ट्रेन की तरह यहां ऐसे रिलीजन्स ही नहीं थे। तो होना यह चाहिए था कि religion के लिए हिंदी में नया शब्द क्रिएट किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा करने की बजाय धर्म (कर्त्तव्य/न्याय) को ही religion का समानार्थी घोषित कर दिया गया। और आज कोई मानने के लिए तैयार ही नहीं है कि धर्म Religion का समानार्थी शब्द नहीं है। सारी की सारी कंन्फ्यूजन की जड़ यहीं हैं। यहीं से सनातन के एक रिलीजन बनने की प्रक्रिया शुरु हुई और परिणाम Hindu Religion के रूप में सामने आया।
मान लीजिए ट्रेन के लिए नया शब्द ‘लौह पथ गामिनी’ क्रिएट करने की बजाय ट्रेन का नाम ‘रथ’ दे दिया जाता, क्या होता? सोचिए फिर हम महाभारत पढते तो हम समझते कि “अर्जुन ट्रेन पर बैठ कर रणभूमि में आया, श्रीकृष्ण अर्जुन की ट्रेन के ड्राईवर थे, श्रीकृष्ण ने इतनी भयंकर ट्रेन चलाई कि रणभूमि में कोहराम मच गया”। विजुअलाईज करके देखिए, सीन एकदम पूरा का पूरा चेंज हो गया कि नहीं एक शब्द की वजह से? तो ऐसे ही religion को धर्म समझ लेने से हुआ है।
गौर कीजिए, जब श्रीकृष्ण गीता में अर्जुन से कहते हैं कि कौरवों पर ‘शस्त्र उठाना तुम्हारा धर्म है’ तो वो अर्जुन के ‘कर्तव्य’ की बात कर रहे हैं या अर्जुन के ‘रिलीजन’ की? ‘शस्त्र उठाना’ किस रिलीजन का नाम है? जब वेदों में धर्मसम्मत आचरण का जिक्र किया जाता है तो ‘न्यायसम्मत’ आचरण की बात हो रही है या किसी रिलीजन के नियमों की? कहीं किसी वेद, शास्त्र में से सिर्फ एक उदाहरण ढूंढ कर लाईए जहां ‘धर्म की रक्षा’ वाक्य का प्रयोग ‘न्याय’ की बजाय किसी religion की रक्षा करने के लिए किया गया हो? क्या किसी वेद में लिखा गया है कि हिंदुत्व खतरे में है, हिंदुओं एक हो जाओ? और यदि धर्म का अर्थ religion है तो इसके विलोम ‘अधर्म’ का अर्थ क्या है? non-religion या ‘अन्याय’?
आपको पता है इतिहास में एक भी सिंगल प्रसंग ऐसा नहीं मिलता जब हम ने कहीं पर आक्रमण किया हो लोगों को अपने रिलीजन में शामिल करने के लिए। कभी सोचा है क्यों? क्योंकि हमारा कभी कोई रिलीजन था ही नहीं।
