ज़िंदगी – A Gazal by GhanShyam Singh Odint

कभी अचानक सदमों से हम ने संभाली जिंदगी
मौत से डर डर कर यूं हम ने निकाली जिंदगी

जिंदगी को अब तलक जिंदगी सा जीया हमने
फिर भी सबने ये कहा सर पर बिठा ली जिंदगी

जेब में कफ़न की तेरा ख़त पुराना रख लिया
कब्र में भी थोड़ी सी हम ने छिपा ली जिंदगी

हर शख्स यहां मशविरा लिये ढूंढता है मुझे
श्याम किन समझदारों के बीच बसा ली जिंदगी

राशन पानी के लिए हसरतें सब बेच दीं
जिंदगी को बेच कर हम ने बचा ली जिंदगी

मानिंद दुल्हन की तुझे नाजों से रखा था कभी
हां मगर अब भाड़ में तू जा ऐ साली जिंदगी

▶ सुनिए — ज़िंदगी

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