X की Real value
गणित तो पढी ही होगी। गणित में सवाल सॉल्व करने का एक साधारण सा तरीका है x मानने का। कि जब हमें किसी ईकाई का ‘वास्तविक मान’ ज्ञात नहीं है तब तक हम अस्थाई तौर पर उसकी वैल्यू x मान लेते हैं ताकि सवाल को आगे सॉल्व किया जा सके। जैसे अगर हमें पता नहीं कि रमेश की आयु 48 वर्ष है तो अस्थाई तौर पर रमेश की आयु x वर्ष मान लेते हैं। फिर जब हमें सवाल सॉल्व करते हुए x की रियल वैल्यू ज्ञात हो जाती है तो हम x के स्थान पर उसकी रियल वैल्यू रखकर सवाल में आगे बढते हैं।
तो कुछ इसी तरह सैंकड़ों-हजारों वर्षों पूर्व हमारे पूर्वजों के सामने बहुत से सवाल थे। गणित के नहीं, जीवन के, इसकी उत्पत्ति, इसका अंत, इसके कारण, उद्देश्य.. ब्रह्मांड की उत्पत्ति, अंत, सीमाएं आदि के संबंध में अनगिनत सवाल थे। और उनके जवाब ढूंढ पाना सीमित संसाधनों के चलते नामुमकिन सा था। तो उन्होंने यह किया कि जो वैल्यू उनको पता नहीं थी उनको x मानना शुरु कर दिया। यह सोचकर कि एक बार x मानकर सवाल पर आगे बढते हैं, दिमाग लगाते हैं, फिर सवाल सॉल्व करते करते जहां x की रियल वैल्यू ज्ञात हो जाएगी तो उसे x के स्थान पर रखकर सवाल आगे सॉल्व कर लेंगे।
जैसे उस समय उन्हें समझ नहीं आया कि धरती के नीचे क्या है तो उन्होंने x मान लिया कि कोई शेषनाग के फन पर या गाय के सींग वगैरह पर टिकी है ये धरती। काफी उठापटक के बाद भी जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि दुनिया बनी कैसे? तो उन्होंने y मान लिया कि दुनिया को किसी ईश्वर, गॉड टाईप किसी अलौकिक शक्ति ने बनाया है। उन्हें पता नहीं था कि इंसान का मरने के बाद क्या होता है? तो उन्होंने z मान लिया कि कोई स्वर्ग-नरक टाईप की चीजें होती होंगी ऊपर आसमान में। उन्हें समझ नहीं आया कि हम धरती पर कर क्या रहे हैं तो उन्होंने मोक्ष, जन्म-मरण, 84 लाख योनियां टाईप का कॉन्सेप्ट x मान लिया और चूंकि गॉड/भगवान दुनिया बना देने के बाद से फ्री ही था तो 84 लाख योनियों का हिसाब किताब रखना उसके गले डाल दिया।
कुल मिलाकर उनके द्वारा इस टाईप के अनगिनत x,y,z माने गये। फिर पीढी दर पीढी सवाल सॉल्व होते गये और बहुत से x की हमें रियल वैल्यू पता चलती गई जैसे कि हमारे द्वारा x माने गये शेषनाग के फन की रियल वैल्यू गुरुत्वाकर्षण बल है। हमारे द्वारा x माने गये चंदा मामा, शनि महाराज, मंगल देव की रियल वैल्यू महज उल्कापिंड है। कंस की बहन मानी गई बिजली देवी की औकात हमारे मोबाइल चार्ज करने की है इत्यादि इत्यादि। हालांकि अभी हम सवाल के बहुत ही प्रारंभिक स्टेज पर हैं और सभी माने गये variables (x,y,z) की रियल वैल्यू पता नहीं लग पाई है। लेकिन फिर भी जिन x की रियल वैल्यू हमें पता चल चुकी है उनकी वैल्यू हम सवाल में रखते हुए सॉल्व करते जाएंगे तो शायद किसी दिन पूरा सवाल सॉल्व हो जाएगा और एक दिन सभी variables की रियल वैल्यू ज्ञात हो जाएगी।
लेकिन इसी बीच समस्या यह है कि कुछ लोग x को ही रियल वैल्यू घोषित कर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब एक बार किसी ईकाई की वैल्यू x मान ली गई है तो फिर उसे बदलना उनके धर्म, मजहब और परम्परा के खिलाफ है। ऐसे लोगों को आगे सवाल सॉल्व करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। एकदम मूर्खता से जिद पकड़ कर बैठ गये हैं। इनका कहना है कि फालतू में हर अलग अलग प्रॉब्लम का सॉल्यूशन ढूंढने की क्या आवश्यकता है, इनके variable (धर्मग्रंथ) को ही हर सवाल की रियल वैल्यू माना जाए। इनके variable में ही सब रियल वैल्यूज छिपी हुई हैं, हर समस्या का समाधान छिपा हुआ है, सब समस्याओं का एक समाधान। और वो यह कि रमेश की आयु भी x वर्ष है, उसके बेटे सुरेश की आयु भी x वर्ष है, उसके भाई राजेश की आयु भी x वर्ष है, दुनिया के सभी लोगों की आयु x वर्ष है और अब वो हमेशा हमेशा के लिए x ही रहेगी। एक देश एक टैक्स, एक आयु एक समाधान। सॉल्व होने के बाद यदि रमेश की वास्तविक आयु 48 वर्ष आ रही है तो आए, हमारी तो जिद है कि रमेश की उम्र तो x वर्ष ही है। क्यों? क्योंकि हमने सवाल के शुरु में यह माना था न। और अब जब एक बार x वर्ष मान लिया तो अब यह x ही रहेगी हमेशा। लेकिन भाई x तो कोई संख्या ही नहीं होती? नहीं होती तो नहीं होती होगी, पर रमेश की उम्र तो अब हमेशा x वर्ष ही रहेगी। हमारी आस्था x में है, तथा जो भी x को रियल वैल्यू मानने से इनकार करेगा उसको जीने नहीं दिया जाएगा। भाड़ में जाए तुम्हारी गणित और तुम्हारी रीजनिंग और भाड़ में जाओ तुम। हमारा x जिंदाबाद था, जिंदाबाद हैै और जिंदाबाद रहेगा।