आपको कोई समझने वाला नहीं है?

जीवन में कई बार ऐसी समस्याएं या सवाल आते हैं जिनके बारे में हम अपने दोस्तों या परिजनों से भी बात करने में झिझकते हैं। हमें डर होता है कि कहीं वो हमें जज ना करें या फिर हमारा मजाक ना उड़ाएं। लेकिन वो सवाल, वो कशमकश, वो धर्मसंकट हमें निरंतर कचोटते रहते हैं। वो सवाल धर्म (faith) के बारे में हो सकते हैं, हमारे अस्तित्व के बारे में हो सकते हैं, रिश्तों के बारे में हो सकते हैं, पैरेंटिंग के बारे में हो सकते हैं, मनोविज्ञान के बारे में हो सकते हैं, दर्शन के बारे में हो सकते हैं, गलत-सही के बारे में हो सकते हैं.. हमारे मन की कोई सीमाएं थोड़ी हैं? यह कुछ भी सोच सकता है और कहीं भी जा कर उलझ सकता है।

वैसे तो भारत में हर कोई रायबहादुर है और बिना मांगी राय हर कहीं उपलब्ध है, लेकिन वो राय अधिकतर बहुत ही generic होती है और सदियों पुरानी रटी-रटाई होती है। ना तो वो राय देने वाले के निजी अनुभव होते हैं और ना ही वो राय लेने वाले की सिचुएशन में उपयोगी होते हैं। सच कहा जाए तो हमारे आसपास ऐसे लोग उपलब्ध ही नहीं हैं जो हमारी बात समझ सकें। इसलिए हम देखते हैं कि हर आदमी अपने अंदर ही अंदर एक जंग लड़ता हुआ प्रतीत होता है।

विदेशों में इसके लिए साइकोलॉजिस्ट होते हैं। हमारे यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। साइकोलॉजिस्ट छोड़िए, बहुत बार तो हम अपने करीबी लोगों से ही डिस्कस नहीं कर पाते हैं। बंदा आत्महत्या कर लेता है लेकिन किसी से अपनी समस्या पर बात नहीं कर पाता है।

मुंबई में एक एक्टर मेरा रूममेट था, 2-3 साल संघर्ष के बाद जब एक्टिंग में कुछ खास नहीं हो पाया तो वापस अपने घर चला गया और अपने पापा का कंस्ट्रक्शन का बिजनेस संभालने लगा। साल दो साल में शादी हो गई। सब ठीक था। एक दिन किसी प्रोग्राम में जाना था, पत्नी को बोला कि तुम नीचे चलो मैं आता हुं। पत्नी नीचे 15-20 मिनट इंतजार करने के बाद वापस गई तो वो आत्महत्या कर चुका था।

उसके मुंबई छोड़ देने के बाद मेरा अधिक संपर्क नहीं था, घटना से लगभग 6-8 महीने पहले बात हुई थी। नॉर्मल हाय-हैल्लो टाईप। लेकिन मुझे हमेशा गिल्ट फील होता है कि मुझे ज्यादा available होना चाहिए था। हो सकता है कि शायद मैं टच में होता तो वो मुझसे शेयर कर पाता। हालांकि वो फोन करता तो मैं उपलब्ध था, लेकिन शायद हमें कई बार पता भी नहीं होता कि कोई है भी जिससे हम बात कर सकते हैं, हमें अपने आसपास कोई available नजर नहीं आता और हमें लगता है कि कोई नहीं है।

यह पोस्ट सिर्फ यह बताने के लिए है कि मैं उपलब्ध हुं। जब कभी भी आप में से किसी को इमोशनल सपोर्ट की जरूरत हो, कोई उधेड़बुन हो, बेझिझक मुझे फोन/मैसेज करें।

हालांकि जिस समाज और माहौल में हम बड़े हुए हैं वहां भावनात्मक मदद मांगना या खुल कर बात कर पाना सहज नहीं है। बहुत बार होता है कि अगला व्यक्ति कुछ बात करने के लिए फोन करता है लेकिन वो खुल कर अपनी बात कह नहीं पाता है। इसलिए मैं एक नया विकल्प और शुरु कर रहा हुं।

आप मुझे नीचे दिए गए लिंक पर जा कर गुप्त मैसेज भी कर सकते हैं। इसमें आपकी कोई भी निजी जानकारी (नाम, पता, फोन नंबर, ईमेल आदि) बताने की जरूरत नहीं है। बस सिर्फ अपना मैसेज टाईप कीजिए और भेजिए। सवाल मेंटल हैल्थ, व्यापार, करियर, पढाई, सिनेमा, संगीत, पैरेंटिंग, हिस्ट्री, फिलॉसफी या जीवन के किसी भी पहलू से हो सकता है, जो भी आपको लगता हो कि मैं इसमें आपकी हेल्प कर सकता हुं। सामान्य सवाल या जिज्ञासाएं भी भेज सकते हैं, मुझे सलाह भी दे सकते हैं। मुझे नहीं पता लगेगा कि मैसेज किसने किया है। मैसेज करने पर आपको एक कोड मिलेगा, मैं उस कोड को mention करके अपना जवाब एक वीडियो में दे दूंगा।

https://odintwala.com/ask

मेरा ऐसा कोई दावा नहीं है कि मेरे पास सब सवालों/समस्याओं के समाधान हैं, लेकिन कई बार हमें समाधान की नहीं सिर्फ किसी सुनने/समझने वाले की जरूरत होती है। तो कभी भी आपको आवश्यकता महसूस हो, मुझे फोन/मैसेज करें.. मेरा नंबर आपके पास नहीं हो या फिर फोन/मैसेज पर बात करने में असहज हों तो इस लिंक पर गुमनाम मैसेज करें।

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