Corona Lockdown
देखिए मजाक अपनी जगह है, बाकी सरकार को अब लॉकडाऊन खोल देना चाहिए। 3 मई को नहीं, तुरंत ही। क्योंकि कोरोना से ज्यादा तो जनता लॉकडाऊन से त्रस्त है। और सबसे ज्यादा त्रस्त है देश का मजदूर वर्ग। नहीं नहीं, मजदूर वर्ग भूख से त्रस्त नहीं है, भूख से डेढ महीने में कोई नहीं मरा, आगे भी नहीं मरेगा। मजदूर वर्ग त्रस्त है कि 5 रूपये में मिलने वाला मिराज (जर्दा) आज लॉकडाऊन की वजह से 100-150 रूपये में और देशी पव्वा 100 रूपये तक में खरीदना पङ रहा है। वो भी कोई बङी समस्या नहीं है, असली समस्या यह है कि कईयों को तो मिराज खाना छोङना तक पङ रहा है। नहीं, इसलिए नहीं कि 150 में खरीद नहीं सकते, खरीद तो 1000 में भी लेंगे लेकिन मार्केट में मिल ही नहीं रहा है।
मिराज संकट के अलावा लॉकडाऊन की वजह से जो सबसे विकट समस्या देश के सम्मुख आज आन खङी है वो है “हताई की समस्या”। इस संकट की भयावहता का अंदाजा आप इस से लगाइए कि गुवाङ (चौपाल) में बैठे लोगों को यह तक पता नहीं लग पा रहा है कि किसके घर में आज कौनसी सब्जी बनी है। लोग इतने कष्ट में हैं कि पुलिस के डर के बावजूद अपनी जान पर खेलकर हताई करने गुवाङ में पहुंच रहे हैं। यदि यह लॉकडाऊन इसी प्रकार जारी रहा तो कोरोना से ज्यादा लोग तो गांवों में हताई की कमी से मर जाएंगे।
और अगर इस प्रकार का लॉकडाऊन झेलकर कोरोना से बचे भी रह गये तो क्या फायदा इस नीरस जीवन का? इस तरह मर मर कर जीने का? व्यर्थ है वह जीवन ही जिसमें मिराज मिले ना हताई। क्या यही वह भारत है जिसका सपना गांधीजी ने देखा था? क्या यही दिन देखने के लिए नेहरू जी ने एडविना के साथ जै भिम करके कुर्बानी दी थी? क्या यही वह भारत है जिसको आजाद करवाने के लिए बाबा साहब ने अंग्रेजों की लाठियां खाईं थीं? नहीं, यह हमारे महापुरुषों की कल्पना का भारत नहीं है।
इसलिए हे सरकार बहादुर, तुरंत लॉकडाऊन खोलिए, अभिच के अभिच। हम ने मान लिया कि आप बहुत जनहितैषी हैं, अब जनता को टॉर्चर करना बंद कीजिए लॉकडाऊन के नाम पर। लोगों को रमजान मनाने दीजिए, नमाज पढने दीजिए मस्जिदों में इकट्ठे हो कर। वो तो वैसे ही आपसे नहीं रुक रहे तो क्यों लॉकडाऊन का दिखावा कर रहे हैं? लॉकडाऊन है भी नहीं, बस ये लॉकडाऊन के नाम पर जो भी बचा खुचा है इसे भी खोल दीजिए। वैसे भी लगभग-लगभग जनता तो माताजी को सीरा (हलवा) चढाकर, नीम के जादुई पत्ते खाकर, धूप में बैठ बैठ कर कोरोना से ऑलरेडी सुरक्षित हो ही चुकी है, उनको तो कोरोना होना नहीं है। बाकी जिनको मरना होगा वो मिराज खा कर, हताई करके तृप्त हो कर मरेंगे, उनकी आत्माएं भटकेंगी नहीं। मस्जिदों में नमाज पढ कर मरेंगे तो सीधा जन्नत जाएंगे, हूरें मिलेंगी, यहां उनको जबरदस्ती जिंदा रखकर क्या दे पाएंगे आप? पंचवर्षीय योजनाओं में क्या प्रावधान किए हैं आपने देश के अल्पसंख्यकों के लिए हूरों की उपलब्धता हेतु? अगर नहीं किए हैं तो फिर कौन होते हैं आप उनको जबरदस्ती जिंदा रखकर जन्नत से वंचित करने वाले? चाणक्य ने भी तो कहा था कि जगो, उठो, दौङो, भागो लेकिन लक्ष्य प्राप्ति तक न रुको। तो आप होते कौन हैं उनको जन्नत का लक्ष्य प्राप्त करने से रोकने वाले? जिनको जिंदा रहना होगा, अपने परिवार को बचाना होगा वो लॉकडाऊन खोल देने के बाद भी घरों में अपने आप बैठे रहेंगे। इसलिए खोल दीजिए प्लीज।
#Corona #Lockdown
