Bollywood Remakes

यह तय है कि हर “फटाफट लाभ” हमें लॉन्ग रन में नुकसान ही पहुंचाता है। और जब नुकसान हो चुका होता है तब जाकर अक्ल आती है कि “मुट्ठी भर बाजरे के लिए दिल्ली की सल्तनत चली गई”।

बॉलीवुड ने साऊथ फिल्मों की रीमेक पर रीमेक बनाईं, बिना किसी मेहनत के खूब पैसा छापा। लगा कि यह बढिया फॉर्मूला मिल गया है, ना कोई राईटर चाहिए ना डायरेक्टर, बस एक बढिया सा ढाई मिनट का ट्रेलर काटना है सिर्फ।

बॉलीवुड में यही दिक्कत है कि भेड़चाल और फॉर्मूला-चाल है। किसी ने लॉन्ग टर्म में नहीं सोचा कि यह चीज हमारी क्रेडिबिलिटी खत्म कर देगी। दरअसल जब भी आप किसी की कोई चीज कॉपी कर रहे होते हैं, आप सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर रहे होते हैं कि मैं इससे बेहतर नहीं बना सकता हुं, इसलिए मुझे यह कॉपी करनी पड़ रही है। आप उसका प्रभुत्व (superiority) स्वीकार कर रहे होते हैं, खुद को उससे कमतर (inferior) साबित कर रहे होते हैं खुद ही।

बॉलीवुड ने खुद को सार्वजनिक रूप से साऊथ फिल्म इंडस्ट्री से छोटा घोषित किया बार बार, साऊथ की रीमेक्स बना बना कर। अधीनता स्वीकार की। आज जो आप पब्लिक का पर्सेप्शन देखते हैं कि “अरे यार बॉलीवुड तो कचरा है, फिल्में तो साऊथ वाले बनाते हैं”, यह परसेप्शन बॉलीवुड की उसी स्वीकारोक्ति का परिणाम है। जब खुद बॉलीवुड ने स्वीकार कर लिया कि वो साऊथ से कमतर हैं तो फिर पब्लिक क्यों नहीं स्वीकार करेगी? और यह जो आप KGF2 जैसी फिल्मों का जबरदस्त कलेक्शन देखते हैं वो सिर्फ और सिर्फ उसी पर्सेप्शन का ही परिणाम है। क्योंकि दुनिया में बमुश्किल एक प्रतिशत लोग होंगे जो स्वविवेक से फैसले ले पाते होंगे, बाकी 99 प्रतिशत दुनिया पर्सेप्शन से चलती है। वही 99 प्रतिशत जनता KGF जैसी फिल्मों को करोड़ों कमवा रही है।

और यह पर्सेप्शन साऊथ ने नहीं बनाई है, बॉलीवुड ने साऊथ को खुद बनाकर दी है अपने “फटाफट लाभ” के चक्कर में। आज से कुछ साल पहले “साऊथ की फिल्में तो कचरा हैं” यह पर्सेप्शन थी मार्केट में। साऊथ की फिल्मों को देखने वाला व्यक्ति “चौमूं” कहलाता था (याद कीजिए कि लोग हंसते थे यह कहकर कि तू साऊथ की फिल्में देखता है?), साऊथ की फिल्मों और रजनीकांत पर मीम्स बना करते थे, भोजपुरी सिनेमा से तुलना होती थी, लेकिन उस कचरे को सामाजिक स्वीकारोक्ति दिलवाई खुद सलमान, शाहरुख, अजय देवगन, अक्षय कुमार, शाहिद कपूर, जॉन अब्राहम ने साऊथ की रीमेक्स बना बना कर। परिणाम यह है कि हिंदी पट्टी में भी आज टक्कर RRR बनाम ATTACK/Runway34/Heropanti2 के बीच नहीं, बल्कि RRR और KGF2 के बीच हो रही है।

और फिल्मों के बाद अब यही सेम चीज म्यूजिक इंडस्ट्री में हो रही है। हर फिल्म में एक “ऑलरेडी हिट” पंजाबी गाना रिक्रिएट (कॉपी) करके डालकर अभी तो पैसे कमा ले रहे हैं लेकिन पब्लिक देख रही है कि आपसे पंजाबियों से बेहतर गाने नहीं बन पा रहे हैं इसलिए आप को वहां से गाने उठाने पड़ रहे हैं। कॉपी करके पैसा कमाया जा सकता है लेकिन क्रेडिबिलिटी नहीं। आप पंजाबी कलाकारों की बॉलीवुड से बेहतरी (superiority) खुद स्थापित करते जा रहे हैं। परिणाम भी आपके सामने हैं, जिन प्रदेशों में आज से 5-7 साल पहले तक 0.000001% पंजाबी समझने वाले लोग नहीं थे वहां आज पंजाबी कलाकारों के प्रोग्राम्स में बॉलीवुड कलाकारों से ज्यादा भीड़ इकट्ठी होती है। और उन जगहों पर पंजाबी कलाकारों को पहुंचाया है खुद बॉलीवुड ने।

(राजस्थानी म्यूजिक इंडस्ट्री वालों समझ तो गए ही होगे? या तुम पर एक पैरा स्पेशल लिखकर समझाऊं कि लोकगीतों को रिक्रिएट कर करके कभी credible नहीं बन पाओगे। पंजाबी में भी फॉक म्यूजिक की कमी नहीं थी रिक्रिएट करने के लिए, वो भी सिर्फ रिक्रिएट के पीछे पड़े रहते तो आज तक रिक्रिएट ही कर रहे होते, उनके ओरिजनल गाने आज बॉलीवुड नहीं रिक्रिएट कर रहा होता)

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