Russia Ukraine war

हिंदुस्तान में सब लोग गलत प्रोफेशन में हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, पत्रकार, फिल्मकार आदि आदि बने हम जैसे लोग घूम रहे हैं जबकि होना हम सबको “जज” चाहिए था। आज से 15 दिन पहले हम को ईमानदारी से पता नहीं था कि यूक्रेन नाम का भी कोई देश है और अगर है तो है कहां पर? लेकिन आज देखिए, हम सबके पास एक ‘जजमेंट’ है। एक के हिसाब से इस युद्ध में पूरी गलती पुतिन की है, दूसरे के हिसाब से सब कुछ जेलेंस्की की मूर्खता की वजह से हुआ है पुतिन तो “बेचारा” मजबूर है। और तीसरे वालों के हिसाब से हमेशा की तरह दुनिया में कहीं कुछ भी हो रहा है तो गलती ऑब्वियशली अमेरिका की है।

काश जिंदगी इतनी स्पष्ट तौर पर Black & White होती, कि हिंदी फिल्मों की तरह असल जिंदगी में भी एक हीरो और दूसरा विलेन होता, तो हम सब अभी मिलकर हीरो के लिए चीयर कर रहे होते। लेकिन जिंदगी बहुत कॉम्प्लिकेटेड है इसमें हीरो-विलेन जैसा कोई स्पष्ट विभाजन नहीं होता। इसलिए मेरा ‘जजमेंट’ यह है कि हीरो/विलेन वाले ठप्पे तो बस मोहमाया हैं। कई बार सारे ही विलेन होते हैं और कई बार कोई भी विलेन नहीं होता। सब हमारा देखने का नजरिया भर है, असल में सारा खेल घटनाओं और परिस्थितियों का है। घटनाएं ऑटोमैटिकली होती जाती हैं और परिस्थितयां बनती जाती हैं।

इसे ऐसे समझिए कि आप और मैं पड़ोसी हैं। मुझमें और आप में किसी चीज को लेकर अनबन हो गई, बात गाली गलौच, धक्का मुक्की और “तुझे तो मैं देख लूंगा कभी” की धमकी तक पहुंच गई। हालांकि आगे लड़ने का मन हम दोनों का ही नहीं था, हम दोनों ही चाहते थे कि यह चैप्टर यहीं खत्म हो जाए। लेकिन मान लीजिए कि मैं दिखने में आपसे थोड़ा तगड़ा और तंदुरुस्त हुं तो आप क्या करेंगे कि मेरे डर से “अपनी सेफ्टी के लिए” एक डांग खरीद कर लाएंगे ताकि रात बेरात घर से निकलते टैम साथ रख सको। अब मैंने आपकी डांग देखी तो मुझे लगा कि अच्छा.. मुझे मारने के लिए लठ लिए घूम रहा है (जबकि आपका ऐसा कोई इरादा नहीं था, आप तो खुद डरे हुए थे)। मैं डरता हुआ रातोंरात जाकर एक रिवॉल्वर लेकर आया “अपनी सेफ्टी के लिए”। फिर आपको खबर मिली कि मैं रिवॉल्वर ले आया “आपको मारने के लिए” तो आप क्या करोगे? आप ने अपने दोस्त को बुला लिया AK47 लेकर “अपनी सेफ्टी के लिए”। मैंने सुबह देखा कि मेरे गेट के पास एक बंदा AK47 लहराते हुए घूम रहा है और उधर आप अपनी छत पर खड़े खड़े बाकी दोस्तों को भी फोन लगा रहे हो (अपनी सुरक्षा के लिए) कि जल्दी आओ मेरी मदद के लिए। मैंने सोचा आज तो पूरी तैयारी है, मुझे निपटाने के लिए पूरी गैंग बुलाई जा रही है, वो सब पहुंचने से पहले मुझे इसे निपटाना होगा (अपनी सेफ्टी के लिए) वरना आज मैं तो गया काम से। मरना तो अब है तो क्यों ना इसे मारकर मरूं। यह सोचकर मैंने तुरंत अपनी रिवॉल्वर उठाई और बजरंग बली का नाम लेकर टूट पड़ा आपके घर पर। आपका AK47 वाला दोस्त तो मेरे हाथ में रिवॉल्वर देखते ही भाग छूटा कि AK47 तो बीवी ने सिर्फ दिखाने के लिए दी थी, चलाने के लिए मना किया हुआ है। इसमें गोलियां ही नहीं है, मुझे तो लगा था कि दिखाने से ही काम हो जाएगा।

अब मैं आपके घर के अंदर हुं, आपके पास लठ है और मेरे पास रिवॉल्वर। मरोगे तो आप भी लेकिन जिंदा मैं भी नहीं बचूंगा आपको मारने के बाद। मेरी बदनामी हुई सो अलग और बाकी की जिंदगी अब कोर्ट कचहरी जेल में कटेगी सो अलग। इसलिए मैं आपको मारना नहीं चाहता, लेकिन करूं क्या, आपने मुझे मारने के लिए AK47 मंगवा ली तो मुझे जिंदा रहने के लिए, अपने परिवार की “सेफ्टी के लिए” आपको मारना जरूरी हो चुका है अब।

तो बताइए कि हम दोनों में से कौन हीरो है और कौन विलेन? किसकी गलती है इस घटनाक्रम में? या किसकी गलती ‘ज्यादा’ है इसमें?

#RussiaUkraine

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