Social Media
ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम अलग अलग एप्प नहीं बल्कि अलग अलग दुनियाएं हैं। एक टिकटॉक नामक दुनिया भी थी जिसका इंस्टाग्राम में विलय हो गया। इन दुनियाओं में इतनी विभिन्नता है कि इंस्टाग्राम वाले प्राणी को ट्विटर पर कुछ समझ नहीं आएगा और ट्विटर वाला इंस्टा पर 10 मिनट में झिल जाएगा और जबरदस्ती ज्यादा देर रोका गया तो फोन से अपना सिर फोड़ लेगा। वो यह देखकर खुदकुशी भी कर सकता है कि भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के तीन लाख से कम फॉलोअर्स हैं और उसकी गली में “छाणा चुग रही छोरी” के तीन मिलियन फॉलोअर्स हैं।
इंस्टाग्राम वाली दुनिया मोहमाया से विरक्त है, सब हरा भरा है वहां। सब चंगा सी। उस दुनिया में ना रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, ना पेट्रोल डीजल के भाव बढ रहे हैं, ना बिजली कटौती है, ना कोई दंगा है, ना कुछ और समस्या। स्वर्ग अगर कहीं है तो वो इंस्टाग्राम पर ही है। वहां हर तरफ खुशहाली है, सब एलन मस्क से ज्यादा अमीर हैं, किसी के जीवन में कोई समस्या या दुखदर्द है ही नहीं, सब स्माइलिंग-स्माइलिंग है, कोई गरीब नहीं है, सबके बैकग्राउंड में चमचमाती गाड़ियां खड़ी हैं, सबके पास आईफोन हैं जिससे शीशे के सामने खड़े होकर वे फोटो और रील्स बनाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि सब के सब सेलिब्रिटी हैं, कोई आम इंसान है ही नहीं वहां। असमानता का नामोनिशान नहीं है। सारे ही सुंदर और गोरे लोग बसते हैं वहां। सौंदर्य के प्रति अद्भुत जागरूक समाज है वो, रात को एक बजे भी कोई लाईव में एड होगा तो फुल मेकअप के साथ। सारी की सारी प्रजा बादशाह अकबर की तरह कला एवं संगीत की पारखी है। अधिकतर लोग संगीत, काव्य और नृत्य कला का सम्मान व प्रोत्साहन करते हैं। सिर्फ प्रोत्साहन ही नहीं बल्कि जिनके हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं वो तो सब गाने बना भी रहे हैं। फिर वो लाईव में लोगों को एड कर कर के उनसे अपना गाना देखने और उस पर रील बनाने की प्यार भरी मनुहार करते हैं। जिसके एक मिलियन फॉलोअर्स होते हैं उसके लाईव में भी सिर्फ 100-50 दर्शक जुड़े होते हैं क्योंकि बाकी 9,99,950 लोगों का खुद का गाना आ रहा होता है तो वो उसके प्रमोशन में खुद का “निजी लाईव” कर रहे होते हैं। और जो 100-50 लोग इनका लाईव देख रहे होते हैं वो भी इनके लाईव में एड होकर अपने गाने का प्रमोशन करने का वेट कर रहे होते हैं। फिर अपना नंबर आने पर अपने गाने का प्रमोशन करके किसी दूसरे लाईव में एड होने निकले पड़ते हैं। जो गानों की मोहमाया से बचे खुचे लोग हैं वो सब शहंशाह हैं, अपनी रील्स में वो शायरी द्वारा हमें बताते है कि उनका कोई मुकाबला नहीं है, वो सबके बाप हैं, दुनिया में उनके नाम का डंका बज रहा है, आग लगा रखी है उन्होंने दुनिया में, उनके सामने किसी की कोई औकात नहीं है, मोदी पुतिन किमजोंग सब चिल्लर हैं उनके आगे।
बाकी सबसे बड़ी वहां की विशेषता है आपसी सहयोग जो कि बहुत मजबूत है, सब एक दूसरे की रील में एक दूसरे को टैग करते हैं और सामने वाला वापस उसको अपनी स्टोरी में मेंशन करता है, जिस मेंशन को पहला वाला वापस अपनी स्टोरी में मेंशन करता है जिसे कि दूसरा वाला वापस अपनी स्टोरी में मेंशन करता है। यह क्रम अनवरत जारी रहता है, और वो स्टोरी 24 घंटे तक चौरासी लाख जूणियों में भटकती रहती है। वहां की करेंसी बिटकॉइन की ब्लॉकचैन की माफिक कॉम्प्लिकेटेड होने की बजाय एकदम सीधी सपाट है। लाईक के बदले लाईक और फॉलो के बदले फॉलोबैक। सिंपल ट्रांजेक्शन। इस हाथ दे उस हाथ ले। यूरो, डॉलर, रूपये की तरह नहीं कि रोज फल्क्चुएशन होता रहे। इसके अलावा वहां की पब्लिक स्वास्थ्य के प्रति भी बेहद जागरूक हैं, हर रील में बस “चलने” के अलावा कुछ नहीं करते। मेकअप करके, विग पहनकर, चश्मा लगाकर सजधज कर हर रील में पैदल चलते हुए सब एक दूसरे को संदेश देते हैं वॉकिंग करना पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद है, खासकर जींस पहनकर।
परमानेंट रेजीडेन्सी का हिसाब किताब यहां कनाडा जैसा है, बहुत आसानी से मिल जाती है, आप दिन के 24 घंटे में से 7-8 घंटे लाईव रह सकते हैं बिना रोक टोक के। पहले मुझे इन पर खीझ आती थी कि अजीब चंदरू लोग हैं यार पूरे दिन कैमरा चालू किए बैठे रहते हैं, फिर एक दिन एक लाईव में घटना घटित हुई जिसने मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। किसी लाईव में एक बंदा एड हुआ, लाईव में पहले से मौजूद बाकी लोगों ने उससे जय माता जी वगैरह अभिवादन किए, लेकिन उस निर्मोही बंदे को कोई मतलब नहीं उनसे, वो आते ही निर्लिप्त भाव से बिना किसी भूमिका और संदर्भ के ही अपनी भड़ास निकालना शुरु हो गया कि दुनिया में सब मतलबी हैं, कोई किसी का नहीं है वगैरह वगैरह। लाईव आयोजित करवा रहे शख्स का गाना आ रहा था तो वो बात को अपने गाने पर लाना चाह रहा था लेकिन उस बंदे को कोई मतलब नहीं गाने से, वो दुनिया के स्वार्थीपन पर अपनी भड़ास निकालता रहा। तब मैं सोचने पर मजबूर हुआ कि जिन लोगों पर मुझे खीझ हो रही थी वो तो दरअसल सहानुभूति के हकदार हैं। कितने अकेलेपन के शिकार हैं कि इनकी लाईफ में ऐसे लोग ही नहीं बचे जिनसे बात करके ये अपना जी हल्का कर सकें, अपना रंडीरोना इनको अनजान लोगों के सामने सार्वजनिक बैठकर रोना पड़ रहा है। जिनके बीवी बच्चे, फैमिली, दोस्त वगैरह होते हैं वो शाम के टाईम उनके साथ बैठकर टाईम स्पेंड करते हैं, लेकिन दुनिया में सब इतने खुशकिस्मत नहीं हैं, इसलिए जिनके ये सब नहीं होते उनको शाम से लेकर रात तक इंस्टा पर लाईव में अजनबी लोगों के साथ झूठी मुस्कराहट और फर्जी कैरेक्टर ओढे हुए टाईम बिताना पड़ता है। जिन लोगों से कोई जान पहचान नहीं, लेना देना नहीं उनके हालचाल पूछने और उनको अपने हालचाल सुनाने पड़ते हैं। जिनको पिछले बर्थडे पर जानते तक नहीं थे उनके जन्मदिन पर स्टोरियां लगानी पड़ती हैं। जिनको पिछले फ्रेडशिप डे पर पहचानते तक नहीं थे उनके साथ “तेरे जैसा यार कहां..” पर रीलें बनानी पड़ती हैं। इनकी नकली मुस्कराहट के पीछे की उदासी महसूस कीजिए, खुद को परफेक्ट दिखाने की कोशिशों के नीचे दबी फड़फड़ाती इनकी असली शख्सियत की मजबूरियां समझिए। ऐसे लोगों से हमदर्दी रखी जानी चाहिए। इन लोगों से प्यार से पेश आईए, इनके साथ शालीन व्यवहार कीजिए। इनका अकेलापन इनको डिप्रेशन की तरफ ले जा रहा है जो आगे चलकर सुसाइड में कन्वर्ट हो सकता है। कुछ भी दिल दुखाने वाली बात अनजाने में भी इनको कहने से बचिए।
और यह आखिरी वाली बात मैं सीरियसली कह रहा हुं, मजाक की बात नहीं है।