क्या पढा जाए?
कई लोग इनबॉक्स में पूछते हैं कि पढने के लिए किताबों के नाम सुझाइए।
मेरा कहना है कि किताबें मत पढिए, किताबों से बचिए (खासकर इतिहास की)। किताबें आपको चौमूं बनाती हैं। किताबें क्या हैं? किताबें ऐतिहासिक घटनाओं की ‘लेखक के अनुसार’ व्याख्या है। यानी किताबें लेखक की ऑपिनियन भर होती हैं, एकतरफा। कोई कितना भी निष्पक्ष होने का दावा करे, हो पाता नहीं है। इतिहास के किसी टॉपिक पर किताब पढने से बेहतर है कि घटनाएं पढिए, फैक्ट्स पढिए, फिर अपनी खुद की स्वतंत्र ऑपिनियन बनाइए। पैसे दे कर रेडीमेड ऑपिनियन मत खरीदिए किताब के रूप में।
जैसे कि आप भारत की आजादी को समझना चाहते हैं तो आजादी पर लिखी हुई एक बुक मत खरीद कर लाईए। उसमें आजादी के वही 5-7 कारण दिए होंगे जो लेखक के हिसाब से आजादी के कारण थे। लेखक गांधीवादी होगा तो सारा श्रेय गांधी-नेहरू को दिया हुआ मिलेगा।
इसलिए बेहतर है कि उस समय की परिस्थितियों, घटनाओं को पढिए, समझिए.. कि उस समय विश्व में चल क्या रहा था। इंडिया में क्या चल रहा था, इंग्लैंड में क्या चल रहा था, हिटलर क्या कर रहा था, मुसोलिनी क्या कर रहा था, जापान में क्या चल रहा था, अमेरिका में क्या चल रहा था, क्या परिस्थितियां बनी हुई थीं दुनिया में। फिर सारे डॉट आपस में कनेक्ट कीजिए। आपको खुद-ब-खुद समझ में आ जाएगी सारी तस्वीर। फिर पता चलेगा कि भारत क्यों और कैसे आजाद हुआ था।
इस तरह पढिए। किताबें पढ कर तो सिर्फ एग्जाम पास किए जाते हैं। ज्ञान चाहिए तो मेहनत कीजिए। किताबों से बचिए, घटनाएं पढिए और वो भी विभिन्न स्रोतों से, सिर्फ एक स्रोत से नहीं। इंटरनेट के इस युग में रॉयल ब्रिटिश लाईब्रेरी जैसी कई लाइब्रेरियां ऑनलाईन हो गई हैं, जिनकी वेबसाइट पर कई ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्स, पत्र, तस्वीरें आदि आपको ऑरिजनल मिल जाते हैं। किसी और की लिखी किताबों द्वारा उन डॉक्यूमेंट्स की व्याख्याएं पढने की बजाय ऑरिजनल पढ कर खुद अपनी व्याख्याएं बनाईए। अपने आसपास देखिए, ऑब्जर्व कीजिए, फिर सोचिए कि जो आप पढ रहे हैं वो आपके आसपास की वर्तमान दुनिया से कनेक्ट हो रहा है या नहीं? अगर नहीं हो रहा है तो समझिए आप झूठ पढ रहे हैं। जैसे कोई आपको कहता है कि 400-500 साल पहले 9 फीट के आदमी हुआ करते थे, तो यह झूठ है। किसी सीरियल में दिखा रहा है कि 200 साल पहले सोने से लदे हुए लोग घूम रहे हैं तो अपने घर में किसी बुजुर्ग से पूछ लीजिए कि उन्होंने सोने का आभूषण पहली बार कब और कौनसा पहना था? कहीं आप पढते हैं कि आपसे हजारों साल गटर साफ करवाए गये थे तो अपने दादाजी से जा कर पूछ लीजिए कि 50 साल पहले गटर होते भी थे क्या? इतिहास को वर्तमान से कनेक्ट करके पढिए, अगर चीजों को समझना है तो। वरना तो बस एंजॉय कीजिए, पढना भी क्यों है टीवी सीरियल देखकर ही इतिहास पर गर्व कर लीजिए।