राजस्थानी गाने कैसे बनते हैं?
राजस्थानी में दरअसल गाने बनते ही नहीं हैं। राजस्थानी में गानों के नाम पर सिर्फ Reels (वही instagram वाली) बनती हैं जिनकी ड्यूरेशन गाने जितनी यानी 3-4 मिनट की होने से वो सिर्फ गाने का भ्रम देती है। किसी को इस बात से असहमति हो तो वो राजस्थानी गानों और इंस्टा रील्स में ड्यूरेशन के अलावा कोई फर्क ढूंढ कर बताए। तो गाने के नाम पर ये रील्स बनाने की चुल क्यों उठती है और आखिरकार कैसे मिटती है उस पर आज हम विस्तृत भड़ास निकालेंगे। राजस्थान से बाहर के मित्रगण कृपया पोस्ट यहीं छोड़ देवें।
दुनिया में हर आदमी/औरत को फेमस होना है। फेमस होने का अभी टिकटॉक बंद होने के बाद सबसे सस्ता और सुलभ तरीका जो बंदे को दिखाई देता है वो है इंस्टाग्राम। हर दिन 4-5 घंटे लाईव आओ और डेली की 2-4 रील्स बनाओ। उससे भी काम नहीं बने तो दस बीस हजार फॉलोअर्स खरीद लो और बन जाओ इन्फ्लूएंसर। लेकिन इसके बाद क्या, इतना तो हर कोई कर लेता है 5-10 हजार खर्च करके। इंस्टा पर ‘30 सैकंड’ की reels तो सारी दुनिया बना रही है। तो फिर खुद को कुछ अलग दिखाने के लिए इसका सॉल्यूशन निकलता है कि हम कुछ हट कर करेंगे, हम 30 सैकंड की बजाय 3-4 मिनट की reel यूट्यूब पर बनाएंगे, जिसको हम गाने का नाम दे देंगे। गाने का टशन भारी पड़ेगा दोस्तों-रिश्तेदारों पर, सेलेब्रिटी वाला फील आएगा।
ये तो हुआ गाने बनाने का कारण और उद्देश्य। अब आते हैं इंट्रेस्टिंग पार्ट पर, यानी मेकिंग प्रोसेस पर जो कि मोटामोटी टोटल 6-7 दिन का प्रोसेस होता है। गाना बनाना है तो सबसे पहले ऑडियो चाहिए। ऑडियो के लिए सबसे पहले लिरिक्स चाहिए, जो कि लिखने या लिखवाने की इनमें किसी की औकात नहीं है, क्योंकि इंस्टाग्राम पर 5-7 हजार खर्च करके खरीदे गए 20-30 हजार फॉलोअर्स के साथ ऑफर में क्रिएटिविटी फ्री नहीं आती है। तो फिर तलाश शुरु होती है ऐसे गाने की जिसका कोई धणी-धोरी नहीं हो, जिन्हें हम इंग्लिश में Folk Song कहते हैं यानी जो सैंकड़ों बरसों पहले बने हैं और उन्हें बनाने वालों का किसी को पता नहीं है। जिन पर किसी का कॉपीराइट नहीं है यानी कि लोकगीत।
अच्छा एक चीज और कि ये राजस्थानी गाने बनाते हैं तो इसे इनका राजस्थानी भाषा या राजस्थान से प्रेम मत समझिए, यह सिर्फ और सिर्फ इनकी मजबूरी है। चूंकि ऐसे अनाथ गाने हिंदी में हैं नहीं, तो इनको राजस्थानी लोकगीत उठाने पड़ते हैं वरना ख्वाब तो इनका सीधा बॉलीवुड स्टार बनने का ही होता है।
राजस्थानी फॉक सॉन्ग इन्होंने अपने जीवन में पहले कभी सुने नहीं होते हैं, सुनते तो ये टोनी कक्कड़ के गाने हैं, इसलिए ये वो लोकगीत कभी नहीं उठा पाते जिनको वास्तव में आज रिक्रिएट किए जाने की दरकार है। जैसे कि रैपरिया बालम ने Hariyala Banna को रिक्रिएट किया है, उस ओरिजनल गाने को सुनिए और रैपरिया जी का वर्जन सुनिए तो आपको पता चलेगा कि वास्तव में Re-Create करना होता क्या है? रिक्रिएशन में कुछ वैल्यू एड होनी चाहिए गाने में, जबकि ये लोग उल्टा जो वैल्यू गाने में ऑलरेडी होती है उसका भी बलात्कार कर डालते हैं। खैर वो ज्ञान की बातें फिर कभी, फिलहाल बस इतना समझिए ये जो कर रहे हैं वो री-क्रिएट नहीं बल्कि सिर्फ री-मिक्स है..
हां तो, इनका डिस्कशन कभी इस चीज से शुरु नहीं होता कि किस नये सब्जेक्ट पर गाना बनाया जाए, बल्कि शुरु ही इस बात से होता है कि “अबकी बार कौनसे गाने को रिक्रिएट करें? Moriyo करें या पहले Mor Bole Re करें?”
आखिरकार 15-20 मिनट की इस महा-कंन्फ्यूजन के बाद ये रिक्रिएट करने के लिए गाना खोजने के लिए क्या करते हैं कि यूट्यूब पर Veena Music या KS Records खोलकर उस पर सर्च करते हैं कि कौनसे गाने के सबसे ज्यादा व्यूज हैं, बस उसी को भुनाना है।
अब थोड़ी समस्या आती है कि वहां से as it is नहीं उठा सकते इसलिए उसमें दो चार शब्द/लाईनें आगे पीछे करने के लिए इनको आवश्यकता पड़ती है एक ऐसे बंदे की जिस पर Lyricist का ठप्पा लगा हो, यानी कि जो पहले से 100-200 लोकगीतों की मां-बहन कर चुका हो, मतलब औसतन हर लोकगीत को 4-5 बार ऑलरेडी रगड़ चुका हो। अब इनकी क्रिएटिविटी का अंदाजा इस बात से लगाइए कि “चांद सरिसो मुखड़ो” को “मुखड़ो चांद सरिसो” करने के लिए भी इनको एक दूसरा बंदा चाहिए, इतना हेरफेर भी यह खुद नहीं कर सकते।
खैर.. इनकी इस समस्या का समाधान करने के लिए एकाध बंदे यहां ऐसे भी घूमते पाए जाते हैं जो खुद को Lyricist कहते हैं, उनका काम सिर्फ यह होता है कि इंस्टाग्रामर्स-यूट्यूबर्स को ऐसी चार मिनटिया रील्स बनाने के लिए प्रेरित करके अपने रोजगार का जुगाड़ करना और “उणियारो चांद सरिसो” को कभी “चांद जिस्यो उणियारो” तो कभी “मुखड़ो चांद जिस्यो” तो कभी “चंदा सो उणियारो” तो कभी “उणियारो चंदा सो” कर देना। वही 1000-1500 शब्द जो राजस्थानी लोकगीतों में ऑलरेडी सदियों से थे, उन्हीं को आगे पीछे उल्टा सीधा करके ये रोजी रोटी चला रहे हैं, एक भी नया शब्द तक नहीं किसी गाने में। खैर इनकी ज्यादा गलती भी नहीं है, जब लिखवाने वाले इतने में खुश हैं तो नये शब्द और थॉट डालने की फालतू मेहनत क्यों करनी? इस प्रकार कथित Lyricist हंगते हंगते मैक्सिमम आधे घंटे में लिरिक्स रेडी करके इनको पकड़ा देता है।
फिर आता है म्यूजिक का नंबर। इसका जुगाड़ इनके लिए KS Records पर Kajaliyo हिट होने से हो गया, कथित म्यूजिक डायरेक्टर्स ने वो साउंड लाइब्रेरी डाऊनलोड मारी और अब हर गाने में चिपका देते हैं। बस इतना ही तो करना है कि कपिल ने जहां संतूर बजाया है वहां गिटार डाल दो और जहां गिटार डाला था वहां वॉयलिन वगैरह कुछ डाल दो, आधे घंटे में इधर उधर करके ट्रैक बनकर रेडी है। नया सोचना तो कुछ है ही नहीं तो टाईम किसमें लगना है भला?
फिर एक शादी के वीडियो कैसेट बनाने वाले जान पहचान के कैमरामैन को पकड़ो, एक किसी डांस क्लास चलाने वाले को पकड़ो जो कि अपने साथ बैकग्राउंड में नाचने के लिए 5-10 लड़कियां ले आएगा और एक राजपूती कपड़े की दुकान वाले को पकड़ो जहां से पोशाकें मिल जाएं। जेब में थोड़े पैसे हैं तो बैकग्राउंड में दिखने के लिए कोई हवेली या होटल ले लो, नहीं तो किसी सार्वजनिक छतरियों पर या धोरों में उन लड़कियों को नचा कर निपटा दो। इसके अलावा हीरो-हीरोईन के कुछ स्लो-मोशन शॉट काट लो, डांस के बीच बीच में चिपकाने हैं चाहे जरूरत हो या ना हो। बस खत्म काम। 4-5 घंटे लगते हैं, शूट करके काम नक्की। दूसरे दिन एडिट और अगले दिन गाना यूट्यूब पर। लीजिए तैयार है राजस्थान का 346वां Ghoomar या 248वां Hichki या 432वां Kajaliyo या 1345वां Kesariya Baalam।
तो दरअसल जो भी आप राजस्थानी गाने देख रहे हैं, उन्हें गाने नहीं Reels कहिए। रील्स में भी गाना किसी और का होता है, यहां भी गाना किसी और का। रील की तरह ही बस कॉस्ट्यूम पहना, इधर से उधर चले, उधर से वापस इधर चल लिए, जिसको स्लो मॉशन में शूट कर लिया। रील को गाना कहने के लिए जरूरी है कि पीछे बैकग्राउंड में 5-7 रंग-बिरंगी लड़कियां खड़ी करके गोल गोल घुमा दीं, जिनका एकाध ड्रोन शॉट भी ले लिया। वो लड़कियां और उनकी कॉस्ट्यूम्स भी हर गाने में फिक्स सी हैं, शायद सब की एक ही दुकान से आती हैं। डांस स्टेप की और कोरियोग्राफी की कोई जरूरत नहीं है बस हर गाने में सेम तरीके से वही गोल गोल घूमना है।
मोटामोटी देखा जाए तो यह एक तरह से वो प्रस्तुति है जो बचपन में हम 15 अगस्त-26 जनवरी को स्टेज पर दिया करते थे, बस इतना ही फर्क है कि ठीकठाक कैमरे से शूट करके एडिटिंग में इफेक्ट मार दिए जाते हैं। शादी वाली वीडियो कैसेट में औरतों का डांस देख लीजिए या चाहे ये गाने देख लीजिए कोई 19-20 का ही फर्क है। वही घूमर, हिचकी, काजळियो, नैणा रा लोभी आदि बैकग्राउंड में बजाकर शादियों में डांस होता है और उन्हीं लोकगीतों को बैकग्राउंड में बजाकर ये चार मिनट की रील (कथित गाना) शूट कर लेते हैं।
इसीलिए वही सेम टू सेम राजस्थानी लोकगीत हर राजस्थानी म्यूजिक चैनल पर डले हैं, फिर एक नया चैनल खुलता है वो वापस उन सबको दुबारा रीमिक्स करके डालता है, फिर एक और नया चैनल खुलता है वो भी.. अब तो नया राजस्थानी चैनल खुलते ही सारे लोकगीत मिलकर रहम की भीख मांगने लगते हैं।
(हालांकि मैंने कल ही डिजिटल डिस्ट्रिब्यूशन का काम शुरु किया है, आज मुझे यह पोस्ट डालकर खुद के रोजगार पर कुल्हाड़ी नहीं मारनी चाहिए, लेकिन रहा नहीं जाता। राहत इंदौरी के शब्दों में कहें तो - नमाज पढकर आए और शराब मांगने लगे)
