आस्तिक या नास्तिक?

एक बहस के दौरान एक बंधु ने मुझे पूछा था कि आप आस्तिक हो या नास्तिक?

खुद को सिर्फ आस्तिक या नास्तिक में परिभाषित कर पाना मेरे बस की बात नहीं। मेरा मानना है कि ईश्वर हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है अर्थात् मुझे नहीं पता कि वो है या नहीं। दरअसल मुझे कभी पता लगाने की जरुरत नहीं महसूस हुई इसलिए मैंने कभी पता लगाने की कोशिश भी नहीं की।

ईश्वर के अस्तित्व के बारे में दो संभावनाएं हैं- पहली, कि वो है और दूसरी, कि वो नहीं है। 

अगर पहली संभावना सही है तथा वाकई में वो है, तो उसे ढूंढने या साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यदि वो है तो वो सर्वशक्तिमान है और उसकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता यानी जब वो खुद को प्रकट करना चाहेगा या उसे खुद को साबित करने की आवश्यकता महसूस होगी तो वो स्वयं प्रकट हो कर खुद को साबित कर देगा, यानी फिलहाल वो नहीं चाहता खुद को साबित/प्रकट करना। तो हम क्यों उसके पीछे पङे रहें जबरदस्ती उसे साबित करने के लिए?? क्यों बहस, झगङे करते फिरें उसे साबित करने के लिए?? उसकी मर्जी होगी तब वो खुद प्रकट हो जाएगा, हम क्यों लोड लें अनावश्यक??

दूसरी संभावना अगर सही है तो इसका मतलब हुआ कि ईश्वर नहीं है। और जब वो है ही नहीं तो फिर उसे तलाशने में वक्त जाया करने का क्या फायदा? जो चीज अस्तित्व में ही नहीं उसके पीछे बहस, बकैती करने का क्या फायदा?
अर्थात् दोनों ही परिस्थितियों में, ईश्वर है तब भी और नहीं है तब भी.. हमें बिल्कुल भी लोड लेने की और उसे ढूंढते फिरने की या उसे साबित करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए यह मानकर चलिए कि वो हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। है तो भी ठीक और नहीं है तो भी ठीक।

वैसे मुझे निजी तौर पर महसूस होता है कि ईश्वर है। मानने और महसूस होने में अंतर है। मानना तर्क और प्रमाण पर आधारित होता है और महसूस होना सिर्फ हमारे अंतर्मन की धारणा। जैसे मुझे महसूस होता है कि एबी डिविलियर्स सचिन से बेहतर क्रिकेटर हैं, किसी को महसूस होता होगा कि कोहली सचिन से बेहतर हैं, लेकिन प्रमाणित सिर्फ आंकङे ही कर सकते हैं कि कौन श्रेष्ठ है। ‘महसूस होता है’ का मतलब है कि मैं यह साबित नहीं कर सकता, यह बहस नहीं करता कि ईश्वर है ही, यह साबित करने के लिए मेरे पास प्रमाण नहीं है। सिर्फ एक अंदर से फीलिंग है कि ईश्वर है, देवता हैं, भूत प्रेत भी हैं, इस दुनिया से परे भी कुछ है जो हमारी समझ से बाहर है। हो सकता है कि कल को विज्ञान इनके भी राज खोल दे और यह सिर्फ अंधविश्वास निकले।

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