लोल सलाम
रात को मुझे सपना आया (आजकल सपने कुछ ज्यादा आ रहे हैं) कि सम्पूर्ण विश्व में वामपंथ की सत्ता कायम हो चुकी है। चारों तरफ सिर्फ़ लाल सलाम-लाल सलाम की गूंज सुनाई पड़ रही है। सभी पूंजीपतियों का धन लूटकर गरीबों को बांटा जा रहा है। जिसके पास दो मकान हैं उससे एक मकान छीनकर बिना मकान वाले को दिया जा रहा है। जिनके पास दो भैंसें या बकरियां हैं उनसे छीनकर उन्हें दी जा रही है जिनके पास एक भी नहीं थी। चारों तरफ सिर्फ एक ही नारा गूंज रहा है कि सब समान होने चाहिए। सबसे ज्यादा समस्या मुसलमानों को आ रही है क्योंकि जिसके पास भी एक से अधिक बीवियां हैं तो छीनकर बिना बीवी वालों को बांटी जा रही है। बच्चे भी जिनके ज्यादा हैं उनसे छीनकर कम या बिना संतान वालों को बांटे जा रहे हैं। सल्लू भाई को इस सत्ता हस्तांतरण से काफी फायदा हो रहा है, उनके हिस्से में भी एक बीवी और तीन बच्चे आए हैं और उनका हिरण वाला केस आमिर और फुटपाथ वाला केस अक्षय के हिस्से में चला गया है। रितिक की एक्स्ट्रा अंगुली भी काटकर बिना अंगुली वाले को लगाई जा चुकी है। केजरीवाल की ऊपरी ईमानदारी को भी लालू-पवार-राजा-कलमाङी जैसों में बांट देने के बावजूद भी काफी ईमानदारी बच गई है, उसका क्या करना है इस पर फिलहाल पोलित ब्यूरो असमंजस में है। 100-150 प्रशांत किशोर जैसे ज्यादा दिमाग वालों का एक्स्ट्रा दिमाग निकालकर RaGa को लगा दिए जाने के बावजूद भी काफी कम पङ रहा है। संबित पात्रा की एकस्ट्रा जबान मनमोहन जी को लगा देने के बाद अब वो सोनिया द्वारा रोकने के बावजूद बोले जा रहे हैं। किम कार्डिशियन के पास जो सामान एक्स्ट्रा था वो सोनम कपूर को देकर एडजस्ट करना पड़ा है। नवाज को अपनी आधी से ज्यादा एक्टिंग तुषार और कटरीना के साथ शेयर करनी पड़ी है। कोहली की 96% बैटिंग पार्थिव-साहा-बिन्नी-रायुडु के हिस्से में आई है। चारों तरफ यही शोर है कि सब कुछ सभी के पास एकदम बराबर होना चाहिए, तभी असली समाजवाद स्थापित हो सकता है।
मैं भी बहुत खुश हुं क्योंकि लूट में मुझे भी अंबानी की एक गाङी हाथ लगी है। और मेरे पास चूंकि बीवी-बेटा एक एक ही हैं तो मुझे कोई सभस्या नहीं है। लगभग हर तरफ बागों में बहार है, सिर्फ उन लोगों को छोङकर जिनका कुछ न कुछ छीनकर दूसरे को दे दिया गया हो।
तमाम धन सम्पदा बराबर बंट चुकी है। लेकिन तभी एक बौने कामरेड ने मांग उठा दी कि सिर्फ धन सम्पत्ति बराबर बांट लेने भर को वास्तविक साम्यवाद नहीं कहा जा सकता। असली साम्यवाद तब होगा जब सब कुछ बराबर हो, हर व्यक्ति की हाईट भी। इसलिए पोलित ब्यूरो ने फैसला सुनाया कि कार्ल मार्क्स भगवान की हाइट 5 फीट 8 इंच को आदर्श हाइट घोषित किया जाता है, जिसकी भी लम्बाई इससे ज्यादा है तो उस एक्स्ट्रा हाइट को काटकर जिसकी हाइट कम है उसमें जोङ दिया जाएगा और सबकी हाइट समान रखी जाएगी।
अचानक मुझे कई बौने कामरेडों ने घेर लिया एक्स्ट्रा 4 इंच काटने के लिए, जिसमें कि मेरा आधा चेहरा आ रहा था। लेकिन तभी मुझे ख्याल आया कि मेरा तो सिर्फ 4 इंच चेहरा ही जा रहा है, पर बेचारे खली का क्या जिसे बीच में से काटा जाना है। कामरेड मुझे काटने ही वाले थे कि आंखे खुल गई। शुक्र मनाया कि चलो फिलहाल वामपंथ का बंगाल से भी सफाया हो चुका है।
लेकिन इस सपने से समझ आया कि दरअसल मनुष्य प्राकृतिक रुप से असमान है। इसलिए असमानता ही प्राकृतिक न्याय है और समानता सिर्फ एक भ्रामक ख्वाब।
(आखिरी पैराग्राफ़ को ध्यान से दुबारा पढें)