धर्म
धर्म क्या है?
धर्म शब्द की अनेक व्याख्याएं हो सकती हैं। प्राचीन काल में इसका अर्थ देखा जाए तो धर्म का प्रचलित अर्थ था – ऐसी जीवन पद्धति जो न्यायसंगत तथा कर्तव्यसंगत हो। हालांकि तत्कालीन स्थापित मतानुसार सामान्यतया सर्वजनकल्याण ही ‘न्याय’ था तथा इस न्याय की रक्षा करना ‘कर्तव्य’ था, लेकिन अलग अलग परिस्थितियों में न्याय और कर्तव्य को परिभाषित करने के लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र था। धर्म का शाब्दिक अर्थ (translation) भी अब हम अंग्रेजी के Religion या उर्दू का मजहब लेते हैं, जबकि धर्म का शाब्दिक अर्थ भी ‘कर्तव्य’ था। जैसे – माता पिता की सेवा करना पुत्र का ‘धर्म’ है, बहिन की रक्षा करना भाई का ‘धर्म’ है। यहां धर्म का अर्थ है ‘कर्तव्य’ यानी Duty, ना कि मजहब यानी Religion। ‘कर्तव्य’ जो कि व्यक्ति को अधिकतर परिस्थिति व काल अनुसार खुद तय करने होते थे, हालांकि कुछ (जैसा कि ऊपर उदाहरण दिया गया है) लोकप्रचलित नैतिक कर्तव्य भी थे।
अब मजहब यानी Religion का अर्थ समझिए। Religion का मोटा मोटी अर्थ है ‘A fix set of unchangeable and unquestionable rules’। नियम (rules) और कर्तव्य में क्या फर्क है? नियम अपरिवर्तनीय होते हैं जबकि कर्तव्य काल (समय) एवं परिस्थिति आधारित। इसे गणित की तरह एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए कि आप को 8 बजे स्कूल पहुंचना है, ये आपके मजहब (Religion) का नियम है। आपको रास्ते में जाते हुए कोई बच्चा नदी में डूबते हुए दिख गया, यदि आप उसको बचाने जाएंगे तो आठ बजे स्कूल नहीं पहुंच पाएंगे। आपका मजहब कहता है कि आठ बजे स्कूल पहुंचना है मतलब पहुंचना ही है हर परिस्थिति में, आपको उस बच्चे को बचाने के बारे में सोचने और निर्णय लेने की आजादी नहीं है, अधिक से अधिक भी आप अपने मजहब की किताब खोल कर उसमें ढूंढ सकते हैं कि किताब में बच्चे को बचाने के बारे में कुछ लिखा गया है या नहीं। अगर नहीं लिखा है, तो फिर आपका उस बच्चे को बचाना हराम (un-religious) है। जबकि धर्म आपको आजादी देता है कि आप स्वविवेक से निर्णय ले सकते हैं कि आपके लिए स्कूल पहुंचना अधिक महत्वपूर्ण है या बच्चे की जान बचाना अधिक जरुरी है। जो भी आपको अधिक न्यायसंगत लगे वो करने के लिए आप स्वतंत्र हैं। यानी बेसिकली मजहब/Religion (धर्म की नई परिभाषा) और धर्म (प्राचीन परिभाषा) में फर्क है नियम और स्वविवेक का। नियम अर्थात आपको अपने दिमाग का इस्तेमाल किए बगैर वही करना है जो आपको गाइडलाईन जारी की हुई है, वो सही है या गलत यह सोचने और सवाल पूछ्ने का अधिकार आपको नहीं है। स्वविवेक अर्थात कुछ भी फ़िक्स नियम नहीं, आप स्वतंत्र है काल (समय) और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने के लिए, अपना दिमाग इस्तेमाल करने के लिए। तो जैसे ही आप स्वविवेक का गला घोंट कर फ़िक्स नियम तय कर देते हैं, वो धर्म नहीं रह जाता फिर मजहब हो जाता है। जैसे ही आप इसे सवालों से परे घोषित करते हैं ये धर्म से मजहब का रूप अख्तियार कर लेता है। मजहब हो जाते ही फ़िर इसके विकास की संभावनाएं मर जाती हैं, ये जड़ हो जाता है। धर्म स्वविवेकियों के लिए है जबकि रिलीजन उन मूर्ख भेड़ों के लिए जिनमें स्वविवेक नहीं है।
धर्म कैसे बना? और रिलीजन कैसे बने?
धर्म की फ़ंक्शनिंग wikipedia के आर्टिकल की तरह है, एक व्यक्ति ने यहां वहां से फ़ैक्ट्स जानकारियां इकट्ठे करके विकीपीडिया पर एक आर्टिकल लिखा, दो दिन बाद किसी को उसमें खामी दिखी तो उसने इसे संशोधित कर दिया, चार दिन बाद किसी को कुछ और अनुभव जोड़ने हों तो वो इस आर्टिकल में जोड़ सकता है। और इस प्रकार वर्तमान में हम जो विकीपीडिया आर्टिकल देखते हैं वो बहुत से लोगों के स्वविवेकपूर्ण और ज्ञानपूर्ण सहयोग से अस्तित्व में आया आर्टिकल है जिसमें कि अब भी संशोधन की गुंजाइश है, समयानुरूप संशोधन किया जा सकता है। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग की भाषा में कहा जाए तो धर्म Open Source स्क्रिप्ट है, इसमें कोई भी, कभी भी संशोधन कर सकता है। धर्म एक पीढी से दूसरी पीढी तक संशोधित होते हुए पहुंच रहा ज्ञान है।
जबकि मजहब (Religion) आपकी स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चिपका दिया गया नोटिस है। आप इस पर सवाल नहीं उठा सकते, इसके कंटेट पर तर्क नहीं कर सकते, इसमें संशोधन (edit) नहीं कर सकते, आपको सिर्फ़ इस नोटिस में लिखे गये आदेश का पालन करना है। क्यों? क्योंकि इस पर प्रिंसिपल की सील और साईन है। हालांकि आपने प्रिंसिपल को सील लगाते या साईन करते नहीं देखा है, ना ही आपने चौदह सौ वर्ष पूर्व चपरासी को इसे यहां चिपकाते देखा है। हो सकता है कि चपरासी ने ही प्रिंसिपल के जाली साईन करके इसे यहां चिपका दिया हो। लेकिन नहीं, आप यह सवाल नहीं पूछ सकते, आपको बस इसमें दिए गये आदेश को फ़ॉलो करना है। आप इसकी ऑथेंटिसिटी, सत्यता, तार्किकता, वास्तविकता, न्यायिकता जांचने के अधिकारी नहीं हैं। यही Religion है।
तो जब आप विकीपीडिया के आर्टिकल की editing powers को ‘Everyone’ से ‘Only Me’ कर लेते हैं, तब आपका विकीपीडिया आर्टिकल भी सिर्फ़ नोटिस भर रह जाता है, जिस तरह की आपका सनातन धर्म अब हिंदू रिलीजन भर रह गया है, एकदम जड़। जड़ यानी स्थिर, स्थिर तो पानी भी बदबू मारने लग जाता है जैसे उनका पानी पिछले 1400 सालों से सड़ांध मार रहा है, आपका पानी भी आजकल सड़ांध मारने लगा है। आपको बदबू नहीं आ रही है ना? खुद को बदबू नहीं आएगी, उनको भी तो नहीं आ रही है 1400 सालों से।
पानी को बहने दीजिए वक्त के साथ, यकीन मानिए बहता रहेगा तो शुद्ध रहेगा।
(यह पहला पार्ट है, मूड में रहा तो इसका अगला पार्ट भी लिखा जाएगा जिसमें सनातन के जीवन पद्धति से मजहब में परिवर्तित होने की प्रक्रिया, कारणों तथा परिणामों पर चर्चा की जाएगी, तब तक के लिए नमस्कार)