ज़िंदगी – A Gazal by GhanShyam Singh Odint
कभी अचानक सदमों से हम ने संभाली जिंदगी
मौत से डर डर कर यूं हम ने निकाली जिंदगी
जिंदगी को अब तलक जिंदगी सा जीया हमने
फिर भी सबने ये कहा सर पर बिठा ली जिंदगी
जेब में कफ़न की तेरा ख़त पुराना रख लिया
कब्र में भी थोड़ी सी हम ने छिपा ली जिंदगी
हर शख्स यहां मशविरा लिये ढूंढता है मुझे
श्याम किन समझदारों के बीच बसा ली जिंदगी
राशन पानी के लिए हसरतें सब बेच दीं
जिंदगी को बेच कर हम ने बचा ली जिंदगी
मानिंद दुल्हन की तुझे नाजों से रखा था कभी
हां मगर अब भाड़ में तू जा ऐ साली जिंदगी