Cricket is Dead
Cricket is Dead. और इसमें किसी का नुकसान नहीं है।
किसी जमाने में गेंदबाजी भी एक आर्ट हुआ करती थी। शेन बॉन्ड, ग्लेन मैक्ग्राथ, डेल स्टेन, भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाजों की बॉलिंग देखने के लिए भी मैच देखा जाता था। लेकिन पाटा विकेट, छोटी बाउंड्रीज और सेंसलेस Fielding Restrictions ने इस आर्ट को खत्म करके पूरा गेम ही एकतरफा बना दिया है। अब गेंदबाज सिर्फ इसलिए exist करता है ताकि उसकी फेंकी गेंद पर बल्लेबाज चौके-छक्के लगा सकें। (इसलिए वो दिन अब दूर नहीं जब शायद बॉलर को बॉलिंग मशीन से रिप्लेस कर दिया जाए) बल्लेबाज हर गेंद पर आंख मूंदकर बल्ला घुमा रहा है और हर गेंद पर चौके-छक्के लग भी रहे हैं। यह क्रिकेट तो नहीं है। मनोरंजन जरूर है। मनोरंजन होना भी चाहिए। लेकिन अधिकतर क्रिकेट को नहीं समझने वाली पब्लिक ने चौकों-छक्कों को ही मनोरंजन मान लिया है तो BCCI उन्हें वही परोस रहा है।
निस्संदेह यशस्वी, इशान, संजू, अभिषेक, श्रेयस अच्छे बल्लेबाज हैं लेकिन ऐसा कैसे संभव है कि दुनिया के श्रेष्ठतम गेंदबाजों को हर ओवर में 15-20 रन पड़ रहे हैं। एकाध बार पड़ भी जाए, पर हर दिन हर मैच में ही?
हम कमेंटेटर्स की शिकायत करते हैं कि घटिया कमेंट्री हो रही है। होगी ही। हर गेंद पर एक ही चीज हो रही है तो कमेंटेटर उसको कितना ही अलग तरीके से बता सकता है? मैं तो कहता हुं कि कमेंट्री की जगह अब AI से वॉइस रिकॉर्ड करके यह लाईन हर गेंद के बाद चला देनी चाहिए कि “बल्लेबाज ने फिर आंखे मूंदकर बैट घुमाया और.. एक और छक्का..” जबकि ये सारे छक्के अगर छोटी बाऊंड्रीज और घटिया फील्ड रिस्ट्रिक्शन्स ना हों तो एकदम easy catch हैं।
हालांकि क्रिकेट को जिंदा रखने में आज सबसे बड़ा योगदान Betting Apps का है। अधिकतर लोग मैच देख ही इसलिए रहे होते हैं क्योंकि उन्होने Dream11 पर टीम बना रखी होती है। Dream11 नहीं होता तो वो मैच नहीं देख रहे होते। उन्हें क्रिकेट में कोई इंटरेस्ट नहीं है, सिर्फ करोड़पति बनने में है।
क्रिकेट मर चुका है, लेकिन इसमें किसी का भी नुकसान नहीं है। अधिकतर मैच देखने वाले चौकों-छक्कों के लिए ही मैच देखते हैं, उन्हें वो मिल रहे हैं। क्रिकेटर्स को बढिया पैसा और अच्छी स्पॉन्सरशिप डील्स मिल रही हैं। अगर इस तरह की पिच और बैटिंग नहीं होती तो वैभव सूर्यवंशी इतनी जल्दी स्टार नहीं बन पाते (Talented है, उसमें कोई शक नहीं है)। ब्रॉडकास्टर भी पैसा छाप रहा है, कमेंटेटर्स भी पैसा छाप रहे हैं, BCCI भी पैसा छाप रहा है। बेटिंग एप्प पैसे छाप रहे हैं। सब के लिए win-win सिचुएशन है।