My Quotes
1.
खुद को ना खुद में ढूंढ पाया श्याम,
खुद में खुदा को तलाश करते करते।
2.
हुआ मेरा आगाज दौर-ए-गर्दिश में, ना होगा अंजाम यहीं
फिर टकराऊंगा, गर बाकी रहा मेरा निशान-ओ-नाम कहीं
जीतना है तुझे, तो मेरा कत्ल मुकम्मल करना होगा जिंदगी,
हादसों से हार मान ले, वो कोई और होगा ‘श्याम’ नहीं..
3.
उन को समझने की ख्वाहिश भी क्यों करनी
खुद को बदलने की साजिश भी क्यों करनी
श्याम नाराज ही ठीक हैं कुछ लोग जब
सच को मसलने की कोशिश भी क्यों करनी
4.
थी घर में ही जन्नत, वृद्धालय पहुंचा दी तुमने
मां- बाप नहीं, रब की महर गवां दी तुमने
बस चंद दिनों की मेहमान-नवाजी भर थी
अफसोस.. किनारे लगी नाव डुबा दी तुमने
5.
टीवी पर बहस की शान हो जाएगा
बिन शहादत के भी महान हो जाएगा
अभी तो खुदकुशी का मौसम है श्याम
गर दे दी जान तो किसान हो जाएगा।
6.
हुनर-ए-लफ्फाजी में माहिर है हर शख्स.
तौहीन गर करनी हो तो ‘शरीफ’ कह देता है।
7.
सुना है अपने भी साथ छोड़ देते हैं बुरे वक्त में,
काश ‘बदनसीबी’ को भी हमने अपनों में गिना होता..
8.
क्या गलत है अगर मैं जिंदगी अपनी मर्जी से जीना चाहता हुं,
लोग तो यहां सच भी अपनी पसंद का सुनना चाहते हैं..
9.
सत्यमेव जयते मात्र एक संभावना है, जयते एव सत्यं वास्तविकता है।
10.
आरक्षण की तरह हो गए हैं कुछ इंसान भी,
आजकल मिलते भी हैं तो एहसान की तरह..
11.
बस एक ही वजह से आजकल तनहा नजर आता हुं मैं,
कुछ लोगों को मैं नहीं जमता और कुछ लोग मुझे नहीं जमते।
12.
लोगों के लिए यह मायने नहीं रखता है कि क्या विचार प्रस्तुत किए जा रहे हैं..
बल्कि ये मायने रखता है कि विचार किसके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
13.
इस देश के कानून और इतिहास में एक समानता नजर आती है.. दोनों को हर कोई अपने हिसाब से तोङ-मरोङ कर इस्तेमाल करता है।
14.
बात एकदम सीधी कह देता है
आदमी जरूर टेढा ही होगा..
15.
‘सारी दुनिया जब इस बात को मानती है, फिर तुम क्यों नहीं मानते?‘
इससे घटिया तर्क आज तक इस दुनिया में दूसरा नहीं बना।
16.
The truth is, No one knows what the truth is.
17.
और भी हसरतें हैं ज़माने में, दौलत ही ज़हान थोङी है
तुम ज्यादा कमाते हो हमसे, तो हम पर अहसान थोङी है
काहे बिन मतलब पंचायती की कोशिशें करते हो यार
निजी है मेरी जिंदगी, मुहल्ले का नवरात्र प्रोग्राम थोङी है..
18.
औरत
कोई पैरों की जूती समझता है, कोई सिर पर रखता है। होती है दिल में रखने के लिए, बस वहां कोई नहीं रखता।
19.
मैं बेहद ईमानदार आदमी हुं… जब तक कि मुझे बेईमानी करने का मौका नहीं मिल पाता।
20.
हम पुराने अच्छे मित्रों को छोड़ना भी नहीं चाहते, लेकिन उनसे जुड़े रहने की हमारे पास कोई वजह भी नहीं होती..
21.
ले तू कहे तो खुदा मान लूं तुझे
मेरा क्या है, तू पत्थर हो जाएगा।
मैं घास ह़ुं, उग फिर आऊंगा कैसे भी
तू टूटा तो कंकर कंकर हो जाएगा।
22.
जिंदगी में बुरे दौर नहीं आते जनाब, सच पूछो तो खुद जिंदगी ही एक बुरा दौर है।
23.
बिखर गये सब दानों की तरह यहां वहां
मुश्किल से तो मुट्ठी भर दोस्त बनाए थे..
घर लौटते भी हैं तो अब मेहमां की तरह
घर को चलाने घर से दूर गए बताये थे
24.
समस्या दरअसल यह है कि यहां लोग आपको ‘अपना’ बनाने की बजाय ‘अपने जैसा’ बनाने की कोशिशें करते हैं।
25.
हर शै है जब मुझी में मौजूद
तो दर-बदर खोजता क्या हुं
सोचता हुं मैं कई दफा
कि हर वक्त मैं सोचता क्या हुं
26.
गांव शहर दरबदर भटकता मुसाफिर
बोझा वो जिंदगी का तमाम लिए फिरता है..
जीने की ख्वाहिश करता है पर नादां वो
अपनी ही मौत का सामान लिए फिरता है..
27.
अब तो बता दे जिंदगी थी आखिर क्या तू
एक तेरे वहम में हमने क्या क्या जी लिया..
28.
भखारी में अपनी जवाबों का ढेर पड़ा है
चुप ओढकर हमने अक्सर रिश्ते बचाए हैं
28.
कुछ बुरा होने का ही आज जश्न मनाया जाए
मुद्दतें बीत गई कुछ अच्छा घटने के इंतजार में..
29.
Many more to come..