बलात्कार
देखो ऐसा है कि तुम एक करोङ रुपये जेब में डालकर माथे पर ‘मेरी जेब में एक करोङ रुपये हैं‘ का स्टिकर लगाकर रात को सुनसान जगह पर बेपरवाह घूमोगे तो 99% संभावनाएं हैं कि वो रुपये लूटे ही जाने हैं। जब तक तुम्हारे पास एक करोङ रुपये हैं, हर किसी शख्स से तुम्हारे लूटे जाने का खतरा हर जगह, हर क्षण बना हुआ है इसलिए कितनी भी आजादी हो उसके साथ जिम्मेदारी भी है तुम्हारी, खुद की रक्षा की जिम्मेदारी। जो सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी है क्योंकि तुम्हारे लुट जाने से सरकार को घंटा फर्क नहीं पड़ता है, तुम्हें पड़ता है सिर्फ..
अब बाद में तुम विलाप करते फिरो कि सरकार अपराधियों पर लगाम क्यों नहीं लगाती, मुझे जहां चाहुं, जैसे चाहुं, जितने रुपयों के साथ घूमने की आजादी है। तो उससे ना तो अपराध कम होने वाले हैं और ना ही अपराधी। सरकारें क्या कर सकती है? सरकारें सिर्फ अपराधी को सजा दे सकती हैं, अपराध रोक नहीं सकतीं। कैसे रोकेंगी? सरकार को कैसे पता चलेगा कि ठीक ठाक दिखने वाला यह बंदा आगे चलकर किसी का बलात्कार कर देगा? मान लो सरकार सबको अधिकतम सुरक्षा दे दे। हर औरत के साथ चार पुलिसवाले तैनात कर दे तो क्या होगा? वो पुलिसवाले भी तो इंसान ही हैं ना, वर्दी पहनी है उन्होंने castration थोङी करवाया है।
हां माना कि खराबी तुम्हारे कपङों में नहीं है लोगों के दिमाग में है। माना कि समस्या रात को तुम्हारे अकेले घूमने में नहीं है, लेकिन लोगों की प्रवृति में है। अब है तो है क्या कर सकते हैं? हर इंसान एक potential criminal होता है यानी कि मौका ना मिलने तक शरीफ और मौका मिलते ही अपराध करने को तैयार। इस इंसानी प्रवृति को मिटा सकते हो 7 अरब लोगों में से? नहीं ना? तो क्या कर सकते हो? खुद सावधान रह सकते हो कि नहीं?
यदि एक करोङ रुपये घर से लेकर रात को निकलना जरुरी है तो आत्मरक्षा सीखकर निकलना होगा, कूंगफू-कराटे या जो भी आवश्यक हो। तुम्हारे पास दो ही रास्ते हैं, या तो हर इंसान की प्रवृति बदल दो या खुद को मजबूत/समझदार/चौकस कर लो। पहला तुमसे होना नहीं है, दूसरा चाहो तो कर सकते हो थोङी मेहनत करके। यही एकमात्र विकल्प है। यही वास्तविकता है। अब चाहे तुम मुझे नारीविरोधी कह लो या पुरातनपंथी लेकिन कैंडल मार्च और फेसबुक की पोस्टों से बलात्कार नहीं रुकने वाले।
और ये जो लोग आज तुम्हारे लुटने पर घङियाली आंसू बहा कर नारी विमर्श रहे हैं ये वही लोग हैं जो रोज अखबार ही सिर्फ बलात्कार की खबरों के चटखारे लेने के लिए पढते हैं। MMS को HD में देखे बिना उस पर प्रतिक्रिया भी नहीं दे पाते।
मैं भी इसी भीङ में से एक हुं, इस Trending Topic पर यह पोस्ट लिखकर फाॅर्मेलिटी कर देने के अलावा मेरा कोई योगदान नहीं हो सकता है बलात्कार रोकने के लिए।