​राजस्थान बोर्ड का open letter बिहार बोर्ड को

प्रिय बिहार बोर्ड,
12वीं के परिणाम घोषित करके कुछ फ़ुर्सत मिली तो आज फ़ेसबुक खोला। मेरे 90% पास वाले रिजल्ट का मजा यह देख कर किरकिरा हो गया कि सब लोग तुम्हारे 40% वाले रिजल्ट की सरेफेसबुक इज्जत लूट रहे थे। इसलिए मैंने तुम्हें सांत्वना और कुछ टिप्स देने के लिए यह खुला खत लिखने का निश्चय किया, आजकल फैशन भी है खुले खत का।
तुम 40% रिजल्ट वाले जिस दौर से गुजर रहे हो, 5-7 साल पहले तक मुझे भी हर बार उससे गुजरना पड़ता था। तुम्हें तो याद ही होगा कि मेरा भी रिजल्ट 35-40% ही हुआ करता था, मेरे यहां तो 10वीं पास भी कर लेना सीना 56 इंच का कर देने के लिए काफ़ी था। और लोग इसमें खुश भी थे क्योंकि उन्हें 90-95% वाला चस्का नहीं लगा था। 4-5 बार दसवीं में फ़ेल होते थे तो घर वालों को अंदाजा हो जाता था कि बंदे का टैलेंट पढाई में नहीं है तो फ़िर उसे Agriculture, Security, Mining, Driving जैसे अन्य चैलेंजिंग फ़िल्ड्स में अपना टैलेंट दिखाने का मौका दिया जाता था। आज राजस्थान में जितने भी बेवड़े ड्राईवर तुम्हें दिखाई पड़ते हैं जिनको राइट-लेफ्ट साइड तक का कोई आईडिया नहीं होता, वो सब मेरे उन्हीं स्वर्णिम दिनों की देन हैं। अब जरुरी थोड़ी है कि हर बंदे का टैलेंट पढाई में ही हो.. और जब पढने का टैलेंट ही नहीं है तो फ़िर उसको जबरदस्ती डिग्रियां देकर बेरोजगार बनाने का फ़ायदा भी क्या? फिर एम ए की डिग्री ले कर भी नौकरी का फॉर्म किसी और से भरवाने के लिए मिन्नतें करता बंदा अच्छा थोड़ी लगता है? उससे बेहतर है कि उन्हें 3 idiots दिखाकर वो करने के लिए प्रेरित किया जाए जिसमें उनका इंट्रेस्ट और हुनर हो।
लेकिन इन सीबीएसई वगैरह ने पूरा मार्केट ही खराब कर दिया। हर बच्चे को 90% से ऊपर!! इस महंगाई के दौर में इतना समर्थन मूल्य?? तुम्हीं बताओ कोई 92% वाला ड्राइविंग करे तो ये ड्राईविंग की तौहीन नहीं है क्या? और नहीं तो कौनसे इन्होंने आविष्कार कर लेने हैं इन्हें? इतने सालों में कोई किया हो तो बताओ? अरे करेंगे कहां से जब साले पढते ही सिर्फ नौकरी के लिए हैं। नौकरी तो जैसी तैसी हमारे वालों को भी मिल जानी है। फर्क खाली ये रहना है कि इनके लौंडे इंजीनियर हो कर 15 हजार कमाएंगे और अपने वाले सिक्योरिटी गार्ड हो कर।
हमें भी पता है सीबीएसई वालों कि इतने टैलेंटेड बच्चे तुम्हारे वहां भी पैदा नहीं होते कि सब 90% से ऊपर ले आएं, हो तो आखिर इंडिया में ही ना? सीबीएसई वालों को लगा था कि हर बच्चे को 90% से ऊपर दे देंगे तो सरदार (घरवाले) खुश हो जाएंगे, ईनाम देंगे। लेकिन हुआ क्या? अब वो 96-97% से भी खुश नहीं, सबको 100% से ऊपर चाहिए। फीस 100k और मार्क्स केवल 98%, ये तो सरासर नाइंसाफी है उनके हिसाब से। उनकी देखा देखी हमारे वाले जो 37% लाने पर भी बालाजी की सवामणी किया करते थे, अब 75-80% देने पर भी नाक-भौं सिकोड़ने लगे हैं। मैथिलीशरण गुप्त जी सही तो कह गए थे कि जगति वणिक वृति है रखती, काम नहीं परिणाम निरखती। यहां बच्चे को क्या आता है क्या नहीं उससे मतलब नहीं, बस रिजल्ट में मार्क्स अच्छे चाहिए। जिन पेरेन्ट्स को पूरे साल पता नहीं होता कि बेटा है कौनसी क्लास में, उनको भी रिजल्ट वाले दिन 90% से कम मंजूर नहीं। उनकी भी क्या गलती है वैसे, सारा खेल ही मार्क्स का बचा है आजकल। पड़ोसियों-रिश्तेदारों से इज्जत, कंपनियों से नौकरी, ससुर से बीवी और दहेज सब की मात्रा मार्क्स ही तो तय करते हैं अब। परीक्षा के मार्क्स से और कार्ल मार्क्स से तो पूरा देश परेशान है इन दिनों।

खैर आखिरकार मैंने भी मार्क्स की अहमियत समझते हुए निश्चय किया, रिजल्ट सुधारने का। उसके लिए सबसे पहला कदम उठाया सत्रांक को 10 की बजाय 20 करने का। तुम खुद बचपन से पढाई में कमजोर हो लेकिन इतना गणित तो तुम भी जानते ही होगे कि कॉपी खाली छोड़कर आने वाले विद्यार्थी को जबरदस्ती पास करने के लिए 23 की बजाय 13 नम्बर देना आसान होता है। तो इस प्रकार 20 में से 20 सत्रांक भेजने की जिम्मेदारी स्कूल वालों को देकर मैंने अपने रिजल्ट में काफी सुधार कर लिया। स्कूलों वाले तो इतने ढीठ हैं कि उन लड़कों के भी 20 में से 20 सत्रांक भेजते हैं जो बाकी 80 में से 8 नम्बर भी नहीं ला पाते। हम भी कभी उन स्कूल वालों से सवाल नहीं पूछते, ना ही उनसे अर्द्धवार्षिक परीक्षा की कॉपियां मांगते ह़ै, इंडिया है भाई इतना तो चलता है। हम तो रिजल्ट सुधारने के लिए न्यूनतम पासिंग मार्क्स 25 कर देने का प्रस्ताव भी लाए थे, लेकिन वो ना संभव हो सका तो कॉपियां जांचने वालों को ही टारगेट देना पड़ा कि कम से कम इतने तो तुम्हें पास करने ही हैं किसी भी हालत में।
तो उपरोक्त अथक प्रयासों के बाद मेरे यहां अब सब फर्स्ट क्लास है। तुम भी रिलेक्स रहो, ज्यादा लोड मत लो। 2-4 दिन म़े सब लोग भूल जाएंगे नया मुद्दा ट्रेंड होते ही। कोई नया बलात्कार, घोटाला, हत्या होते ही लोग तुम्ह़े छोड़कर उसके पीछे पड़ जाएंगे। अरे हां, परसों तो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण घटना भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच भी तो है। सिर्फ कल का दिन तुम्हें जैसे-तैसे निकालना है बस। उसके बाद तुम्हें साल भर के लिए कोई नहीं छेड़ेगा। और अगले साल तक तो तुम अपना रिजल्ट का स्तर सुधार ही लोगे, जिस तरह मैंने अपना रिजल्ट का स्तर सुधार लिया, बस शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा है। शिक्षा के स्तर से इस देश में किसे घंटा फर्क पड़ता है वैसे भी। हम तो पैदाइशी विश्वगुरु हैं, अब कौनसा शिक्षा से ब्रह्मांड गुरु बनना है कैंचो।

तुम्हारा अपना
राजस्थान बोर्ड

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